Friday, March 13, 2026

मन के फरेब

 सच कुछ भी हो

पर मन माने तब ना।
वह तो विचार ढूँढे रखता है
अपने आप को बहला कर रखने के लिये।
अपने मुताबिक शब्दों की खुराक से
मन का पेट तो भर जाता है
पर वक़्त की कसौटी पर
ऐसे बहलाव
ऐसे छलावे
खतरनाक ही साबित होते हैं।
पर मन की ये खूबी कि
वह तमाम तरह की खुद ही की
असफलताओं, गलतियों को
यूँ संभालता है कि
जानते हुए भी कि ये सब झूठ है
व्यक्ति उन्हे सच मान बैठता है ....

राकेश 

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