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Tuesday, May 01, 2012
Nine Things Successful People Do Differently - Heidi Grant Halvorson - Harvard Business Review
Thursday, April 19, 2012
Tere baare mein jab socha nahi thaa (Jagjit Singh)
(This video is posted by channel – Pop Chartbusters on YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is
added to this post for knowledge purposes only.)
BADI NAZUK HAI JAGJIT SINGH
KISI NAZAR KO TERA INTEZAR AAJ BHI HAI
"किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है" फिल्म एतबार (1985) का एक बेहद भावुक और अमर गीत है। मूल रूप से इसे भूपिंदर सिंह और आशा भोसले ने गाया था
यहाँ इस गज़लनुमा गीत की मुख्य जानकारी दी गई है:
गीत का विवरण (मूल फिल्म)
गायक: भूपिंदर सिंह और आशा भोसले
संगीतकार: बप्पी लाहिड़ी (Bappi Lahiri)
गीतकार: हसन कमाल
फिल्म: एतबार (1985)
कलाकार: राज बब्बर, डिंपल कपाड़िया और सुरेश ओबेरॉय
इस गीत की मुख्य विशेषताएँ
बप्पी लाहिड़ी का अलग अंदाज़: बप्पी दा आमतौर पर 'डिस्को' संगीत के लिए जाने जाते थे, लेकिन इस गाने में उन्होंने दिखाया कि वे शास्त्रीय और भावुक धुनों में भी कितने माहिर थे।
शायरी की गहराई: हसन कमाल के बोल बहुत ही मार्मिक हैं। "वो प्यार जिसके लिए हमने छोड़ दी दुनिया, वफ़ा की राह में घायल वो प्यार आज भी है"—ये पंक्तियाँ टूटे हुए दिल की दास्तां बयां करती हैं।
गीत के बोल (मुख्य अंश)
"किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है कहाँ हो तुम कि ये दिल बेकरार आज भी है किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है..."
एक रोचक तथ्य
फिल्म 'एतबार' प्रसिद्ध हॉलीवुड फिल्म 'डायल एम फॉर मर्डर' (Dial M for Murder) पर आधारित थी। फिल्म एक सस्पेंस थ्रिलर थी, लेकिन यह गाना अपनी रूहानी मिठास के कारण फिल्म की पहचान बन गया।
(This video is posted by channel – {T-Series Bollywood Classics} on YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is added to this post for knowledge purposes only.)
Monday, April 16, 2012
सवाल जवाब
आजकल
सवाल ही सवाल
खिलते हैं,
फूलों की तरह,
जवाब गुम-सुम से
मिट्टी में,
दबे रहते हैं …..!
(मंजू मिश्रा)
खुशियाँ
मिल जाएँ
खुशियाँ
मुट्ठी भर
तो
बीज बनाकर
छींट दूं उन्हें,
आँगन में !!
बारिश होगी,
अंकुर फूटेंगे
कलियाँ चटकेंगी,
रंग बिखरेंगे,
लहलहाएगी फसल…
भर जायेगा
ज़िंदगी का घर
खुशियों से !
(Manju Mishra)
कविता का पर्याय
दीपक से अधिक मूल्यवान होता है प्रकाश
पांडुलिपियों से अधिक मूल्यवान
होती हैं कविताएं
और अधरों से अधिक मूल्यवान होते हैं
उन पर रचे गए चुंबन।
तुमसे ..
मुझसे..
हम दोनों से..
बहुत अधिक मूल्यवान हैं मेरे प्रेमपत्र।
वे ही तो हैं वे दस्तावेज
जिनसे आने वाले समय में
जान पाएंगे लोगबाग
कि कैसा रहा होगा तुम्हारा सौंदर्य
और कितना मूल्यवान रहा होगा मेरा पागलपन।
तुम्हें जब कभी
जब भी कभी
तुम्हें मिल जाए वह पुरुष
जो परिवर्तित कर दे
तुम्हारे अंग-प्रत्यंग को कविता में।
वह जो कविता में गूंथ दे
तुम्हारी केश राशि का एक-एक केश।
जब तुम पा जाओ कोई ऐसा
ऐसा प्रवीण कोई ऐसा निपुण
जैसे कि इस क्षण मैं
करा रहा हूं कविता के जल से तुम्हें स्नान
और कविता के आभूषणों से ही कर रहा हूं
तुम्हारा श्रंगार।
अगर ऐसा हो कभी
तो मान लेना मेरी बात
अगर सचमुच ऐसा हो कभी
मान रखना मेरे अनुनय का
तुम चल देना उसी के साथ बेझिझक निस्संकोच।
महत्वपूर्ण यह नहीं है
कि तुम मेरी हो सकीं अथवा नहीं
महत्वूपूर्ण यह है
कि तुम्हें होना है कविता का पर्याय।