Thursday, March 26, 2026

अन्धेर

 नागपंचमी आई। साठे के जिन्दादिल नौजवानों ने रंग-बिरंगे जॉँघिये बनवाये। अखाड़े में ढोल की मर्दाना सदायें गूँजने लगीं। आसपास के पहलवान इकट्ठे हुए और अखाड़े पर तम्बोलियों ने अपनी दुकानें सजायीं क्योंकि आज कुश्ती और दोस्ताना मुकाबले का दिन है। औरतों ने गोबर से अपने आँगन लीपे और गाती-बजाती कटोरों में दूध-चावल लिए नाग पूजने चलीं।

साठे और पाठे दो लगे हुए मौजे थे। दोनों गंगा के किनारे। खेती में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती थी इसीलिए आपस में फौजदारियॉँ खूब होती थीं। आदिकाल से उनके बीच होड़ चली आती थी। साठेवालों को यह घमण्ड था कि उन्होंने पाठेवालों को कभी सिर न उठाने दिया। उसी तरह पाठेवाले अपने प्रतिद्वंद्वियों को नीचा दिखलाना ही जिन्दगी का सबसे बड़ा काम समझते थे। उनका इतिहास विजयों की कहानियों से भरा हुआ था। पाठे के चरवाहे यह गीत गाते हुए चलते थे:

Tuesday, March 24, 2026

काबुलीवाला ...........(रवींद्रनाथ टैगोर)

 मेरी पांच वर्ष की छोटी लड़की मिनी से पल भर भी बात किए बिना नहीं रहा जाता। दुनिया में आने के बाद भाषा सीखने में उसने सिर्फ एक ही वर्ष लगाया होगा। उसके बाद से जितनी देर तक सो नहीं पाती है, उस समय का एक पल भी वह चुप्पी में नहीं खोती। उसकी माता बहुधा डांट-फटकारकर उसकी चलती हुई जबान बन्द कर देती है; किन्तु मुझसे ऐसा नहीं होता, मिनी का मौन मुझे ऐसा अस्वाभाविक-सा प्रतीत होता है, कि मुझसे वह अधिक देर तक सहा नहीं जाता और यही कारण है कि मेरे साथ उसके भावों का आदान-प्रदान कुछ अधिक उत्साह के साथ होता रहता है।

Saturday, March 21, 2026

Dhurandhar 2: The Revenge movie reviews

Dhurandhar 2: The Revenge (released March 19, 2026) has sparked a massive divide between critics and fans. While some hail it as a "cinematic masterpiece," others find it to be an overstuffed, loud, and polarizing sequel.

Here is a summary of the reviews:

The Critical Consensus

  • The Runtime: At nearly 4 hours (229 minutes), almost every reviewer mentioned the length. Some found it an immersive "experience," while others (like The Hindu) felt it was "an extended web series" that forgot to breathe.

  • Performance: Ranveer Singh is universally praised for carrying the film. Critics noted that while he was "furniture" in the first part to let Akshaye Khanna shine, he is a "beast" here, shifting between vulnerability and ferocity.

  • The "Akshaye Khanna" Gap: Many reviews (notably Shobhaa De) mentioned that the film misses the smoldering intensity of Akshaye Khanna's Rehman Dakait. While Arjun Rampal and Sanjay Dutt are solid, some felt they couldn't quite fill that void.

  • Tone & Politics: The film is significantly more "in-your-face" than the first. Newslaundry and The Hindu criticized it as "blatant propaganda," citing overt references to demonetization and the current government. However, more "mass-oriented" reviewers (like those on Reddit and Koimoi) felt these elements grounded the story in a satisfying "New India" reality.


Quick Ratings & Highlights

SourceRatingKey Takeaway
The HinduMixed"A loud, violent spectacle... loses sight of the clock."
India Today4/5"Ranveer Singh devours it all... a character study disguised as a war film."
Koimoi4.5/5"Aditya Dhar is a magician... one of the best-written screenplays."
The Indian Express2/5"Lacks the 'mazaa' of the original despite blood and bazookas."
GreatAndhra3.5/5"Epic spy saga... technical excellence but repetitive climax."

What Fans Are Saying

  • The Technicals: The cinematography by Vikash Nowlakha is being called "international standard."

  • The Music: Unlike the first part, the music by Shashwat Sachdev has received mixed reactions. Some miss the "originality" and felt the use of repurposed tracks like Rasputin was hit-or-miss.

  • Rakesh Bedi: Surprisingly, Rakesh Bedi is being called the "man of the moment" for a major twist involving his character toward the end.

Friday, March 20, 2026

चीलें ............( भीष्म साहनी)

चील ने फिर से झपट्टा मारा है। ऊपर, आकाश में मण्डरा रही थी जब सहसा, अर्धवृत्त बनाती हुई तेजी से नीचे उतरी और एक ही झपट्टे में, मांस के लोथड़े क़ो पंजों में दबोच कर फिर से वैसा ही अर्द्ववृत्त बनाती हुई ऊपर चली गई। वह कब्रगाह के ऊंचे मुनारे पर जा बैठी है और अपनी पीली चोंच, मांस के लोथडे में बार-बार गाड़ने लगी है।
कब्रगाह के इर्द-गिर्द दूर तक फैले पार्क में हल्की हल्की धुंध फैली है। वायुमण्डल में अनिश्चय सा डोल रहा है। पुरानी कब्रगाह के खंडहर जगह-जगह बिखरे पडे़ हैं। इस धुंधलके में उसका गोल गुंबद और भी ज्यादा वृहदाकार नजर आता है। यह मकबरा किसका है, मैं जानते हुए भी बार-बार भूल जाता हूँ। वातावरण में फैली धुंध के बावजूद, इस गुम्बद का साया घास के पूरे मैदान को ढके हुए है जहाँ मैं बैठा हूँ जिससे वायुमण्डल में सूनापन और भी ज्यादा बढ ग़या है, और मैं और भी ज्यादा अकेला महसूस करने लगा हूँ।

Thursday, March 19, 2026

खोया हुआ मोती .........( रवींद्रनाथ टैगोर)

 मेरी नौका ने स्नान-घाट की टूटी-फूटी सीढ़ियों के समीप लंगर डाला। सूर्यास्त हो चुका था। नाविक नौका के तख्ते पर ही मगरिब (सूर्यास्त) की नमाज अदा करने लगा। प्रत्येक सजदे के पश्चात् उसकी काली छाया सिंदूरी आकाश के नीचे एक चमक के समान खिंच जाती।

Wednesday, March 18, 2026

इज़्ज़त के लिए..... (सआदत हसन मन्टो)

 चवन्नी लाल ने अपनी मोटर साईकल स्टाल के साथ रोकी और गद्दी पर बैठे बैठे सुबह के ताज़ा अख़्बारों की सुर्ख़ियों पर नज़र डाली। साईकल रुकते ही स्टाल पर बैठे हुए दोनों मुलाज़िमों ने उसे नमस्ते कही थी। जिस का जवाब चवन्नी लाल ने अपने सर की ख़फ़ीफ़ जुंबिश से दे दिया था। सुर्ख़ियों पर सरसरी नज़र डाल कर चवन्नी लाल ने एक बंधे हुए एक बंडल की तरफ़ हाथ बढ़ाया जो उसे फ़ौरन दे दिया गया। इस के बाद उस ने अपनी बी एस ए मोटर साईकल का इंजन स्टार्ट किया और ये जा वो जा।

Friday, March 13, 2026

मन के फरेब

 सच कुछ भी हो

पर मन माने तब ना।
वह तो विचार ढूँढे रखता है
अपने आप को बहला कर रखने के लिये।
अपने मुताबिक शब्दों की खुराक से
मन का पेट तो भर जाता है
पर वक़्त की कसौटी पर
ऐसे बहलाव
ऐसे छलावे
खतरनाक ही साबित होते हैं।
पर मन की ये खूबी कि
वह तमाम तरह की खुद ही की
असफलताओं, गलतियों को
यूँ संभालता है कि
जानते हुए भी कि ये सब झूठ है
व्यक्ति उन्हे सच मान बैठता है ....

राकेश 

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