फिल्म 'बाज़ार' (1982) का यह गीत "दिखाई दिए यूँ कि बेख़ुद किया" न केवल एक गाना है, बल्कि एक मुकम्मल एहसास है। इसे लता मंगेशकर ने अपनी सबसे रेशमी आवाज़ में गाया है और संगीतकार खय्याम ने इसे एक अमर रचना बना दिया है।
यहाँ इस गीत की मुख्य जानकारी दी गई है:
गीत का विवरण
गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: खय्याम
गीतकार: मीर तक़ी मीर (उनकी अमर गज़ल से लिया गया)
फिल्म: बाज़ार (1982)
कलाकार: फारूक शेख, सुप्रिया पाठक, स्मिता पाटिल और नसीरुद्दीन शाह
इस गीत की खास बातें
मीर तक़ी मीर की गज़ल: इस गीत के बोल 18वीं सदी के महान उर्दू शायर मीर तक़ी मीर की गज़ल से लिए गए हैं। खय्याम साहब ने इन पुराने शब्दों को आधुनिक संगीत में इतनी खूबसूरती से ढाला है कि यह आज भी ताजा लगता है।
संगीत की सादगी: खय्याम साहब ने इस गाने में साज़ों (instruments) का बहुत ही कम लेकिन प्रभावी इस्तेमाल किया है। लता जी की आवाज़ को मुख्य रखा गया है, जो सीधे रूह को छूती है।
अभिनय का जादू: गाने के दौरान सुप्रिया पाठक की मासूमियत और फारूक शेख के साथ उनकी केमिस्ट्री बहुत ही सादगी भरी और सुंदर दिखती है। साथ ही स्मिता पाटिल और नसीरुद्दीन शाह के किरदारों की मौजूदगी कहानी में गहराई जोड़ती है।
गीत के बोल (मुख्य अंश)
"दिखाई दिए यूँ कि बेख़ुद किया हमें आप से भी जुदा कर चले..."
फिल्म 'बाज़ार' का संगीत
इस फिल्म का पूरा एल्बम ही एक क्लासिक है। खय्याम साहब ने इस फिल्म के लिए उर्दू शायरी के रत्नों को चुना था:
"दिखाई दिए यूँ" (मीर तक़ी मीर)
"देख लो आज हमको" (मिर्ज़ा शौक़)
"फिर छिड़ी रात" (मखदूम मोहिउद्दीन)
(This video is posted by channel – {Shemaroo Filmi Gaane}
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