यह गीत भारतीय सिनेमा के शुरुआती दौर के सबसे उत्साही और लोकप्रिय गीतों में से एक है। फिल्म 'बहार' (1951) का यह गाना न केवल संगीत की दृष्टि से, बल्कि नृत्य की दृष्टि से भी एक मील का पत्थर साबित हुआ।
यहाँ इस सदाबहार गीत के बारे में कुछ विशेष जानकारी दी गई है:
गीत का विवरण
गायिका: शमशाद बेगम (Shamshad Begum)
संगीतकार: एस. डी. बर्मन (S.D. Burman)
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
फिल्म: बहार (1951)
कलाकार: वैजयंतीमाला (Vyjayantimala)
इस गीत की मुख्य विशेषताएं
वैजयंतीमाला का डेब्यू: यह फिल्म दक्षिण भारतीय अभिनेत्री वैजयंतीमाला की पहली हिंदी फिल्म थी। इस गाने में उनके शास्त्रीय नृत्य की झलक और उनकी चपलता ने उन्हें रातों-रात पूरे भारत में मशहूर कर दिया।
शमशाद बेगम की खनकती आवाज़: शमशाद बेगम की आवाज़ में जो खुलापन और 'बेस' था, वह इस गाने के 'पेप्पी' (उत्साही) मूड के साथ पूरी तरह फिट बैठता है।
एस. डी. बर्मन का संगीत: बर्मन दादा ने इस गाने में लोक संगीत और आधुनिक वाद्य यंत्रों का ऐसा तालमेल बिठाया कि यह गाना 70 साल बाद भी ताज़ा लगता है।
लोकप्रियता और रिमिक्स: यह गाना इतना लोकप्रिय है कि हाल के वर्षों में इसके कई रिमिक्स (जैसे कि आकांक्षा शर्मा का वर्ज़न) भी बनाए गए हैं, लेकिन मूल गाने का जादू आज भी बेमिसाल है।
गीत के बोल (मुख्य अंश)
"सैयां दिल में आना रे, आके फिर न जाना रे छम-छमा-छम-छम... राजा बन के आना रे, मोहे ले के जाना रे सैयां दिल में आना रे..."
एक रोचक बात: फिल्म 'बहार' दरअसल एक तमिल फिल्म 'वाज़काई' (Vazhkai) की रीमेक थी, और वैजयंतीमाला ने ही मूल तमिल फिल्म में भी अभिनय किया था।
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