यह गीत भारतीय शास्त्रीय संगीत और सुगम संगीत का एक अद्भुत संगम है। फिल्म 'गूँज उठी शहनाई' (1959) का यह युगल गीत मोहम्मद रफ़ी और लता मंगेशकर के सबसे सुरीले गीतों में गिना जाता है।
यहाँ इस गीत से जुड़ी कुछ विशेष जानकारी दी गई है:
गीत का विवरण
गायक: मोहम्मद रफ़ी और लता मंगेशकर
संगीतकार: वसंत देसाई (Vasant Desai)
गीतकार: भरत व्यास
फिल्म: गूँज उठी शहनाई (1959)
कलाकार: राजेंद्र कुमार और अमीता
गीत की मुख्य विशेषताएँ
वसंत देसाई का संगीत: वसंत देसाई साहब अपने संगीत में शुद्धता और रागों के प्रयोग के लिए जाने जाते थे। इस गाने में उन्होंने शहनाई के साथ ऑर्केस्ट्रा का बहुत ही सुंदर समन्वय किया है।
शहनाई का जादू: चूँकि फिल्म एक शहनाई वादक की कहानी है, इसलिए इस पूरे गाने में उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की शहनाई की मधुर धुनें पार्श्व (background) में सुनाई देती हैं, जो इसे एक दिव्य अनुभव बनाती हैं।
भरत व्यास के बोल: भरत व्यास जी ने बहुत ही शुद्ध और सरल हिंदी शब्दों का प्रयोग किया है, जो जीवन भर साथ निभाने के वादे को दर्शाते हैं।
गीत के बोल (मुख्य अंश)
"जीवन में पिया तेरा साथ रहे हाथों में तेरे मेरा हाथ रहे जीवन में पिया तेरा साथ रहे..."
फिल्म के बारे में रोचक तथ्य
फिल्म 'गूँज उठी शहनाई' राजेंद्र कुमार की शुरुआती बड़ी हिट फिल्मों में से एक थी, जिसने उन्हें 'जुबली कुमार' बनाने की नींव रखी। इस फिल्म का पूरा संगीत शहनाई पर आधारित होने के कारण आज भी संगीत के छात्रों के लिए एक मिसाल है।
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