यहाँ इस महान रचना के बारे में कुछ खास जानकारियाँ दी गई हैं:
गीत का विवरण
गायिका: जगजीत कौर
संगीतकार: खय्याम (Khayyam)
गीतकार: साहिर लुधियानवी
फिल्म: शगुन (1964)
कलाकार: वहीदा रहमान और कमलजीत
इस गीत की मुख्य विशेषताएं
जगजीत कौर की अनूठी आवाज़: जगजीत कौर की आवाज़ में एक खास तरह की गहराई और भारीपन था जो इस गाने के जज्बात को पूरी तरह से निखार देता है। यह उनका सबसे यादगार फिल्मी गाना माना जाता है।
साहिर की लाजवाब शायरी: साहिर लुधियानवी ने इन शब्दों के माध्यम से निस्वार्थ प्रेम (unconditional love) को परिभाषित किया है—जहाँ प्रेमी अपने साथी के सारे दुख और परेशानियाँ खुद समेट लेना चाहता है।
खय्याम का संगीत: खय्याम साहब ने इस धुन को बहुत ही सरल लेकिन प्रभावशाली रखा है, ताकि सुनने वाले का ध्यान शब्दों के अर्थ पर रहे।
गीत के बोल (मुख्य अंश)
"तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो तुम्हें ग़म की कसम, इस दिल की वीरानी मुझे दे दो..."
एक रोचक तथ्य
जगजीत कौर और खय्याम साहब की जोड़ी ने संगीत की दुनिया में कई बेहतरीन काम किए। जगजीत कौर ने बहुत कम गाने गाए, लेकिन जो भी गाए (जैसे 'बाज़ार' फिल्म का "देख लो आज हमको जी भर के"), वे अमर हो गए।
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