(This video is posted by channel –Vinay Khasturiaon YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is added to this post for knowledge purposes only.)
Rare Live Recording (Often considered the definitive rendition)
Duration
20 minutes, 5 seconds (The length allows for expansive, soulful improvisations typical of live ghazals)
(This video is posted by channel – Abhiyan Karkion YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is added to this post for knowledge purposes only.)
That is one of the most heartbreaking and beautiful modern ghazals ever recorded. The melancholy of Jagjit Singh's voice perfectly captures the profound grief in the lyrics.
I've started playing the lyrical video for "Chithi Na Koi Sandesh" for you.
Chithi Na Koi Sandesh
Detail
Information
Artist
Jagjit Singh
Film
Dushman (1998)
Lyrics
Anand Bakshi
Music Director
Uttam Singh
Theme
The pain of losing a loved one to death; leaving without a trace or message.
Duration
6 minutes, 54 seconds
The famous couplet that defines the song is:
Chithi na koi sandesh,
Jaane woh kaun sa desh, jahan tum chale gaye.
(No letter, no message, who knows which land you have departed to.)
(This video is posted by channel – Saregama Musicon YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is added to this post for knowledge purposes only.)
यह ग़ज़ल केवल एक गाना नहीं, बल्कि बचपन की मासूमियत और सादगी को याद करते हुए हर व्यक्ति के दिल से निकली एक दार्शनिक पुकार है।
विशेषता
विवरण
गीतकार
सुदर्शन फ़ाकिर (Sudarshan Faakir)
संगीतकार
जगजीत सिंह (Jagjit Singh)
एल्बम/फिल्म
यह ग़ज़ल मूल रूप से फ़िल्म 'आज' (Aaj, 1987) के लिए रिकॉर्ड की गई थी।
मुख्य विषय
Nostalgia (पुरानी यादें), बचपन की चाहत, और वयस्क जीवन की जटिलताओं से दूर जाने की इच्छा।
मुख्य संदेश (Main Theme)
ग़ज़ल की शुरुआती लाइनें इसके पूरे सार को बयां करती हैं:
ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लोभले छीन लो मुझसे मेरी जवानीमगर मुझको लौटा दो बचपन का सावनवो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी
गायक अपनी धन-दौलत, शोहरत, और जवानी को भी त्यागने को तैयार है, बशर्ते उसे उसके बचपन के दिन, ख़ासकर बारिश में कागज़ की कश्ती तैराना वाला आनंद वापस मिल जाए।
यादों का चित्रण
सुदर्शन फ़ाकिर ने बेहद ख़ूबसूरत अंदाज़ में बचपन के उन छोटे-छोटे पलों को संजोया है, जिन्हें कोई नहीं भूल सकता:
नानी और परियों की कहानी: महल्ले की सबसे पुरानी नानी, और उनकी कहानियों में परियों का डेरा।
खेल और शैतानियां: गुड़ियों की शादी पर लड़ना-झगड़ना, झूलों से गिरना और फिर संभलना।
मासूमियत: रेत के टीलों पर घरौंदे बनाना, और बनाकर मिटा देना।
यह ग़ज़ल जगजीत सिंह की विशिष्ट शैली - सादगी भरी धुन और गहरी भावना - का उत्कृष्ट उदाहरण है।
जगजीत सिंह और चित्रा सिंह के बारे में रोचक तथ्य
जगजीत सिंह और चित्रा सिंह को भारतीय संगीत के इतिहास में ग़ज़ल के King and Queen के रूप में जाना जाता है।
ग़ज़ल को आम लोगों तक पहुँचाया: इस युगल (Duo) को ग़ज़ल को महफ़िलों की चारदीवारी से निकालकर आम आदमी के बेडरूम तक पहुँचाने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने पारंपरिक ग़ज़ल को एक हल्के, मधुर अंदाज़ में पेश किया।
जगजीत सिंह का शुरुआती संघर्ष: संगीत में आने से पहले, जगजीत सिंह, जिनका मूल नाम जगमोहन सिंह धीमन था, के पिता उन्हें IAS अधिकारी या इंजीनियर बनाना चाहते थे। मुंबई में अपने शुरुआती दिनों में, उन्होंने गुज़ारा करने के लिए विज्ञापन जिंगल्स कंपोज़ किए और शादियों में परफ़ॉर्म किया।
डिजिटल रिकॉर्डिंग के जनक: जगजीत सिंह और चित्रा सिंह भारत के पहले रिकॉर्डिंग आर्टिस्ट थे जिन्होंने 1987 में अपने एल्बम Beyond Time के लिए पूरी तरह से डिजिटल मल्टी-ट्रैक रिकॉर्डिंग तकनीक का इस्तेमाल किया था।
प्यार की अनोखी कहानी: चित्रा सिंह पहले से शादीशुदा थीं और उनकी एक बेटी (मोनिका) भी थी, जब वह 1967 में जगजीत सिंह से मिलीं। जगजीत सिंह उनसे इतने प्रभावित थे कि एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने चित्रा के पहले पति देबो प्रसाद दत्ता के पास जाकर कहा था, "मैं आपकी पत्नी से शादी करना चाहता हूँ।"
संगीत से दूरी (सबसे बड़ी त्रासदी): 1990 में, उनके इकलौते बेटे विवेक सिंह का महज़ 21 साल की उम्र में एक कार दुर्घटना में निधन हो गया। इस सदमे ने इस युगल को पूरी तरह तोड़ दिया। इस घटना के बाद, चित्रा सिंह ने हमेशा के लिए गाना छोड़ दिया और उनका आखिरी संयुक्त एल्बम Someone Somewhere था।
(This video is posted by channel – Saregama Ghazal on YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is added to this post for knowledge purposes only.)
(This video is posted by channel – Saregama Ghazal on YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is added to this post for knowledge purposes only.)
यह ग़ज़ल पूरी तरह से प्रेम और समर्पण की भावना में लिपटी हुई है।
सजन की सुंदरता: शुरुआती शेर प्रियतम (सजन) की सुंदरता का वर्णन करता है, और नायिका स्वीकार करती है कि उसका दिल उसी की यादों में डूबा हुआ है:
सलोना सा सजन है और मैं हूँजिया में एक अगन है और मैं हूँ(मेरा प्रियतम खूबसूरत है और मैं हूँ; मेरे दिल में एक आग/उत्साह है और मैं हूँ।)
ठंडी जलन: शायर (गीतकार) एक विरोधाभास (paradox) का इस्तेमाल करते हैं जो प्रेम की प्रकृति को दर्शाता है। प्रियतम की यादें सुखद हैं, लेकिन दूर होने पर बेचैनी देती हैं:
तुम्हारे रूप की छाया में साजनबड़ी ठंडी जलन है और मैं हूँ(तुम्हारे रूप की छाया में, हे प्रियतम, एक बड़ी ही ठंडी जलन है।)
बेचैनी और पवन: ग़ज़ल में नायिका की बेचैनी को दर्शाया गया है जो प्रियतम के सामने घूँघट भी नहीं उठा पाती, क्योंकि हवा (पवन) भी बहुत चंचल है और रुकावट बन जाती है।
पिया के सामने घूँघट उठा देबड़ी चंचल पवन है और मैं हूँ
यह ग़ज़ल आशा भोंसले की गायकी की बहुमुखी प्रतिभा (versatility) को दर्शाती है, जहाँ उन्होंने हल्के-फुल्के फ़िल्मी गीतों के अलावा क्लासिकल टच वाली ग़ज़लों को भी बड़ी ही संजीदगी से गाया है।
(This video is posted by channel – Saregama Ghazal on YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is added to this post for knowledge purposes only.)