जीवन में किसी को ‘हाँ’ कहने से
कहीं अधिक मुश्किल होता है ‘ना’ कहना
‘ना’ कहने वालों ने हर जमाने में
तमाम जहमतें उठायीं
दर-दर की ठोकरें खायीं
फिर भी झुके नहीं ऐसे लोग किसी के सामने
कहा.... वही
जो लगा ....सही
‘ना’ दुनिया का साफ़-सुथरा
और साहसिक वक्तव्य है
कि जब तक दुनिया में रहेगा यह ‘ना’
प्रतिरोध का माद्दा बचा रहेगा इस धरती पर
तानाशाह जब भूल जाते हैं सुनने की आदत
‘ना’ की एक अस्फुट सी ध्वनि
उन्हें बेइन्तहा परेशान कर देती है
‘ना’ की एक आवाज
सर्वसम्मति की हजार-हजार आवाजों से
बिल्कुल अलहदा दिखायी पड़ती है
ऐसे में जबकि खत्म होती जा रही है
इस दुनिया से प्रतिरोध की तहजीब ही
आदमी की ताकत है यह...... ‘ना’
जिसे नष्ट नहीं कर पाए
एक से बढ़ कर एक मारक हथियार भी
अगर बचाए रखनी है इस धरती पर इंसानियत
तो बचानी होगी हमें अपने पास
सख्ती से.... ‘ना’ कहने की तहजीब...
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