Wednesday, April 11, 2012

ZINDAGI JAB BHI TERI BAZM MEIN - TALAT AZIZ - UMRAO JAAN 1981 - HQ .

SHARAB CHEEZ HI AISI HAI PANKAJ UDAS


(This video is posted by channel – Ramzan Lashari on YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is added to this post for knowledge purposes only.)

 

YouTube EK TARAF USKA GHAR EK TARAF MAIKADA PANKAJ UDHAS

RABBI - Bulla Ki Jaana

  



"बुल्ला की जाणा मैं कौण" (Bulla Ki Jaana Maen Kaun) केवल एक गाना नहीं, बल्कि एक रूहानी अनुभव है जिसने 2004-05 के दौरान भारतीय संगीत जगत में क्रांति ला दी थी। रब्बी शेरगिल (Rabbi Shergill) की आवाज़ और गिटार की धुनों ने सूफी संगीत को एक नया और आधुनिक रूप दिया।

यहाँ इस प्रतिष्ठित गीत के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है:

गीत का विवरण

  • गायक और संगीतकार: रब्बी शेरगिल (Rabbi Shergill)

  • गीतकार: बाबा बुल्ले शाह (Baba Bulleh Shah) - 18वीं सदी के महान सूफी संत।

  • एल्बम: रब्बी (Rabbi - 2004)

  • शैली (Genre): सूफी-रॉक (Sufi Rock)


इस गीत की खास बातें

  1. बुल्ले शाह की कविता: इस गीत के बोल बाबा बुल्ले शाह की एक प्रसिद्ध 'काफी' (कविता) पर आधारित हैं। इसमें इंसान की अपनी पहचान की तलाश और ईश्वर के प्रति समर्पण को दर्शाया गया है। यह कहता है कि मैं न मंदिर में हूँ, न मस्जिद में, और न ही किसी रस्म-ओ-रिवाज़ में।

  2. सूफी-रॉक का जन्म: रब्बी शेरगिल ने पारंपरिक सूफी कलाम को इलेक्ट्रिक गिटार और रॉक बीट्स के साथ मिलाकर एक नई शैली तैयार की, जिसे युवाओं ने बहुत पसंद किया।

  3. सादगी भरा वीडियो: इस गाने का म्यूजिक वीडियो भी बहुत सादा था, जिसमें रब्बी को दिल्ली की सड़कों पर गिटार बजाते हुए दिखाया गया था। इसने गाने की सच्चाई (authenticity) को और बढ़ा दिया।

गीत के बोल (मुख्य अंश)

"ना मैं मोमिन विच मसीतां, ना मैं विच कुफर दीयां रीतां ना मैं पाकां विच पलीती, ना मैं मूसा ना फिरौन बुल्ला की जाणा मैं कौण..."


गीत का गहरा अर्थ

इस गाने का सार यह है कि मनुष्य खुद को धर्म, जाति, स्थान या नाम की सीमाओं में बांधता है, जबकि उसकी असली पहचान इन सबसे परे है। यह अस्तित्ववाद (Existentialism) और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम है।


(This video is posted by channel – {Rabbi Shergill} on YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is added to this post for knowledge purposes only.)

Rekha Bhardwaj Tere ishq mein.mp4





यह गीत रेखा भारद्वाज (Rekha Bhardwaj) के शुरुआती नॉन-फ़िल्मी एलबमों में से एक है, जिसने उन्हें एक ग़ज़ल और सूफी गायिका के रूप में पहचान दिलाई थी।

यह गीत "तेरे इश्क़ में" उनके पॉप कलेक्शन एलबम 'इश्क़ा इश्क़ा' (Ishqa Ishqa) का हिस्सा है।

यहाँ इस वीडियो, गीत और एलबम के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है:

गीत और एलबम का विवरण

विवरणजानकारी
गीत का शीर्षकतेरे इश्क़ में
एलबमइश्क़ा इश्क़ा (Ishqa Ishqa) (लगभग 2000 के दशक की शुरुआत में रिलीज़)
गायकरेखा भारद्वाज (Rekha Bhardwaj)
संगीतविशाल भारद्वाज (Vishal Bhardwaj)
गीतकारगुलज़ार (Gulzar)
शैलीमॉडर्न ग़ज़ल/पॉप/सूफी फ्यूजन

वीडियो और गीत के बारे में विवरण

यह गीत रेखा भारद्वाज के करियर के उन शुरुआती गीतों में से एक है जिसने उनकी आवाज़ की विशेषता (distinctiveness) को स्थापित किया।

  • गीत का सार (Essence): यह गीत प्रेम में एकांत (loneliness) और तन्हाई को दर्शाता है। इसकी शुरुआत में ही गुलज़ार साहब की गहरी और काव्यात्मक पंक्तियाँ हैं: "तेरे इश्क़ में तन्हाईयाँ... तन्हाईयाँ... हमने बहुत बहलाईयाँ..."

  • संगीत की शैली: विशाल भारद्वाज ने इस गीत को एक समकालीन (contemporary) संगीत दिया है। यह पारंपरिक ग़ज़ल से हटकर है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक और आधुनिक वाद्य यंत्रों का उपयोग किया गया है, लेकिन इसका भाव सूफी और ग़ज़ल का है। यह उस समय के पॉप एलबमों में एक नया प्रयोग था।

  • वीडियो की विशेषता: इस गीत का म्यूज़िक वीडियो आमतौर पर एक एलबम वीडियो की तरह ही शूट किया गया है, जिसमें रेखा भारद्वाज को गाने को भावुक तरीके से प्रस्तुत करते हुए दिखाया गया है। यह वीडियो 2000 के दशक की शुरुआत के म्यूज़िक वीडियो एस्थेटिक्स को दर्शाता है, जिसमें सरल लेकिन कलात्मक सेट का उपयोग किया जाता था।

  • गुलज़ार और विशाल का सहयोग: यह गीत गुलज़ार (गीतकार) और विशाल भारद्वाज (संगीतकार) के सफल और प्रतिष्ठित सहयोग की एक और मिसाल है, जो रेखा भारद्वाज की आवाज़ के लिए विशेष रूप से लिखे गए गीतों के लिए प्रसिद्ध है।

यह गीत रेखा भारद्वाज के फैंस के बीच एक कल्ट क्लासिक (cult classic) माना जाता है, जो उनकी बाद की फ़िल्मी सफलताओं, जैसे 'फेमस' (Namak Ishq Ka) और 'ओ साथी रे' (Omkara) की नींव रखता है।

(This video is posted by the channel Music Today on YouTube, and Raree India has no direct claim to this video.) This video is added to this post for knowledge purposes only.)

Afreen Afreen | Sangam (1996) | Hindi Video Song | Nusrat Fateh Ali Khan




"आफ़रीन आफ़रीन" (Afreen Afreen) संगीत की दुनिया का एक ऐसा अनमोल रत्न है जिसे दो अलग-अलग दौर में, दो अलग अंदाज़ में बेहद पसंद किया गया। मूल रूप से यह महान कव्वाल नुसरत फतेह अली खान की रचना है।

यहाँ इस गीत के दोनों लोकप्रिय वर्ज़न्स की जानकारी दी गई है:

1. मूल वर्ज़न (1996)

  • गायक: नुसरत फतेह अली खान

  • गीतकार: जावेद अख्तर

  • संगीत: नुसरत फतेह अली खान

  • वीडियो: इसमें लीसा रे (Lisa Ray) नज़र आई थीं, और यह म्यूजिक वीडियो उस समय बहुत बड़ा हिट हुआ था।

  • खासियत: यह नुसरत साहब के सबसे लोकप्रिय गैर-फिल्मी गीतों में से एक है। इसमें उन्होंने पारंपरिक कव्वाली और पॉप संगीत का बेहतरीन मेल पेश किया था।

2. कोक स्टूडियो वर्ज़न (Coke Studio Season 9 - 2016)

  • गायक: राहत फतेह अली खान और मोमिना मुस्तेहसन

  • खासियत: इस वर्ज़न ने इंटरनेट पर धूम मचा दी थी। मोमिना मुस्तेहसन की सुरीली आवाज़ और राहत साहब की गायकी ने इसे नई पीढ़ी का पसंदीदा गाना बना दिया।

  • लोकप्रियता: यह यूट्यूब पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले दक्षिण एशियाई गानों में से एक है।


गीत के बोल और अर्थ

"आफ़रीन" (Afreen) एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ होता है "प्रशंसा करना" या "वाह-वाह करना"। यह गीत किसी की सुंदरता की तारीफ में लिखा गया है।

"ऐसा देखा नहीं खूबसूरत कोई जिस्म जैसे अजंता की मूरत कोई जिस्म जैसे निगाहों की जादुगरी जिस्म जैसे महकती हुई चांदनी..."


रोचक तथ्य

  • जावेद अख्तर ने इस गीत के माध्यम से सुंदरता को शब्दों में जिस तरह पिरोया है, उसे उर्दू शायरी का एक बेहतरीन उदाहरण माना जाता है।

  • नुसरत फतेह अली खान की आवाज़ का जादुई आलाप आज भी संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर देता है।


(This video is posted by channel – {Saregama Karaoke} on YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is added to this post for knowledge purposes only.)

 


Maine Dil Se Kahan Dhoondh Laana Khushi Full 4K Video | K.K | Rog | Irfan Khan |





Film 'Rog' (2005) ka ye gaana "Maine Dil Se Kaha" aaj bhi har udaas dil ka sahara hai. Is gaane mein K.K. ki awaaz aur Irrfan Khan ki acting ne milkar ek aisa jaadu banaya hai jo kabhi purana nahi hota.

Is gaane ki kuch khaas baatein:

Gaane ka Details:

  • Gaayak (Singer): K.K. (Krishnakumar Kunnath)

  • Sangeetkar (Music): M. M. Keeravani (M. M. Kreem)

  • Geetkar (Lyrics): Neelesh Misra

  • Film: Rog (2005)

  • Lead Actor: Irrfan Khan


Is Gaane ki Visheshtayein:

  1. K.K. ki Deep Voice: K.K. ne is gaane ko jis dard aur gehrai se gaya hai, wo seedhe sunne wale ke dil par asar karta hai. Ye unke sabse iconic sad songs mein se ek hai.

  2. Irrfan Khan ki Acting: Film mein Irrfan Khan ne ek aise insaan ka role nibhaya hai jo andar se tuta hua hai. Unke expressive chehre ne is gaane ke dard ko dugna kar diya hai.

  3. Lyrics ki Gehrai: "Maine dil se kaha dhoond laana khushi, nasamajh laya gum to yeh gum hi sahi" - Ye line zindagi ki kadi sacchai ko darshati hai.

  4. M. M. Keeravani ka Sangeet: 'RRR' aur 'Baahubali' ke music director M. M. Keeravani ne is gaane ko bahut hi simple magar soulful dhun di hai.

Gaane ke Bol (Main Lines):

"Maine dil se kaha dhoond laana khushi Nasamajh laya gum, toh yeh gum hi sahi..."

(This video is posted by channel – {K.K.} on YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is added to this post for knowledge purposes only.)

 


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