Tuesday, October 14, 2025

Chhupa Kar Meri Ankhon Ko - Lata, Mohd Rafi, Shyama, Jawahar Kaul, Bhabhi Song


Here are the details for the song "Chhupa Kar Meri Ankhon Ko":

  • Movie: Bhabhi (1957)

  • Singers: The legendary voices of Lata Mangeshkar and Mohammed Rafi.

  • Starring (Picturized on): Shyama and Jawahar Kaul.

  • Music Director: Chitragupta.

  • Lyricist: Rajinder Krishan.

Description of the Song:

The song translates to a playful exchange where one person covers the other's eyes and asks, "Guess who I am?" The lyrics are poetic and witty, with the response being: "How can I take the name of the one who resides in my heart forever?"

  • Genre: Romantic Duet / Light Classic Melody

  • Mood: Playful, teasing, tender, and deeply romantic.

  • Composition: It features the light, melodious musical arrangement typical of the late 1950s, with a gentle rhythm and a conversational style between the two singers, perfectly capturing the mood of an intimate, flirtatious moment. It remains a beloved classic of that era.

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Zinda Itihaas | Zohra Sehgal


 

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उसी का माल तो बिकता है....Usi ka maalto bikta hai

 उसी का माल तो बिकता है, इस ज़माने में

जो अपने ,नीम के,पत्तों को ज़ाफरान कहे.......





Usi ka maal, to bikta hai, is zamaane mein

Jo apne, neem ke, patton ko , zaafran..... kahe....


Nawaz Deobandi

Painting by Jennifer McCHRISTIAN


Dr. APJ Abdul Kalam Biography in Hindi By Gulzar Saab Motivational Story



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एक मीठी सी चुभन HD - रेशमा और शेरा - वहीदा रहमान, सुनील दत्त - लता मंगेशकर - Old Is Gold


 यह गाना 'एक मीठी सी चुभन' 1971 की क्लासिक हिंदी फिल्म 'रेशमा और शेरा' से है, जिसे लता मंगेशकर ने गाया है और जिसमें वहीदा रहमान और सुनील दत्त पर फिल्माया गया है।

गाने का सार और मतलब इस प्रकार है:

  1. शीर्षक का अर्थ: 'एक मीठी सी चुभन' का शाब्दिक अर्थ है "एक मीठा दर्द (या टीस)"। यह शब्द-समूह प्यार में पड़ने के शुरुआती, सुखद एहसास को दर्शाता है - एक ऐसा रोमांच जो बेचैनी और खुशी दोनों पैदा करता है।

  2. भावना: यह गाना प्रेम की शुरुआती अवस्था, मिलन की तीव्र इच्छा, और अज्ञात भविष्य की चिंता की भावनाओं से भरा हुआ है।

  3. मुख्य भाव और गीत के बोल (आंशिक):

    • गीत में नायिका (रेशमा) अपने अंदर के नए और अनजाने एहसास का वर्णन कर रही है। वह कहती है कि वह हवा में 'एक मीठी सी चुभन, एक ठंडी सी अगन' (एक मीठा दर्द, एक ठंडी आग) महसूस कर रही है। यह विरोधाभास (paradox) बताता है कि प्यार एक साथ सुखदायक और बेचैन करने वाला कैसे हो सकता है।

    • वह बताती है कि उसका मन ही मन में नाच रहा है और मुस्कुरा रहा है, क्योंकि उसके मन का सूना आंगन अब प्यार की बहार से भर गया है।

    • गीत में वह अपने भगवान से यह भी प्रार्थना करती है कि यह 'रसवंती हवा' (प्यार से भरी हवा) कहीं 'तूफान न बन जाए'। यह हिस्सा उनके प्रेम कहानी के दुखद अंत की ओर इशारा करता है, जहाँ उन्हें अपने प्यार को बचाने के लिए सामाजिक दुश्मनी और हिंसा का सामना करना पड़ता है। वह अपने भोले प्यार और अनजान मन के लिए सुरक्षा मांगती है।

  4. संगीत और दृश्य: जयदेव के मधुर संगीत और लता मंगेशकर की मीठी आवाज़ के साथ, यह गाना वहीदा रहमान के चेहरे के भावों के माध्यम से प्यार की मासूमियत, खुशी और अंदरूनी डर को खूबसूरती से प्रस्तुत करता है।

संक्षेप में, यह गीत प्यार के उस पहले और रोमांचक अनुभव का वर्णन करता है जो मन में एक साथ मीठी खुशी और नाजुक चिंता पैदा करता है, विशेष रूप से एक ऐसी प्रेम कहानी में जिसकी राह आसान नहीं है।

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नदी नारे ना जाओ श्याम पैयाँ पडूँ HD - मुझे जीने दो - सुनील दत्त, वहीदा रहमान - आशा भोसले


 

यह गीत भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग का एक बहुत ही सुंदर और प्रसिद्ध लोक-गीत (Folk Song) है। फिल्म 'मुझे जीने दो' (1963) का यह गाना अपनी सादगी और मिट्टी की खुशबू के लिए आज भी याद किया जाता है।

यहाँ इस गीत से जुड़ी कुछ खास जानकारी दी गई है:

Shagoon - Parbaton Ke Pedon Par Shaam - Mohd.Rafi - Suman Kalyanpur




यह गीत फिल्म 'शगुन' (1964) का एक कालजयी क्लासिक (Timeless Classic) है। इसे हिंदी सिनेमा के सबसे रोमांटिक और सुकून देने वाले गानों में गिना जाता है। इस गीत की शांति और गहराई आज भी श्रोताओं को एक अलग दुनिया में ले जाती है।

यहाँ इस गीत से जुड़ी मुख्य जानकारी दी गई है:

गीत का विवरण

  • गायक: मोहम्मद रफ़ी और सुमन कल्याणपुर

  • संगीतकार: खय्याम (Khayyam)

  • गीतकार: साहिर लुधियानवी

  • फिल्म: शगुन (1964)

  • कलाकार: कमलजीत और वहीदा रहमान


गीत की खासियत

  1. खय्याम का संगीत: खय्याम साहब अपनी धुनों में 'ठहराव' के लिए जाने जाते थे। इस गाने में उन्होंने न्यूनतम वाद्य यंत्रों (Minimal instruments) का प्रयोग किया है ताकि रफ़ी साहब और सुमन जी की आवाज़ की कोमलता उभर कर आए।

  2. साहिर की शायरी: "पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है" - ये पंक्तियाँ प्रकृति और प्रेम के मिलन को खूबसूरती से दर्शाती हैं।

  3. सुमन कल्याणपुर और रफ़ी की जुगलबंदी: कई लोग इस गाने में सुमन कल्याणपुर की आवाज़ को लता मंगेशकर की आवाज़ समझ लेते हैं, क्योंकि उनकी गायकी में वही सुरीलापन और सादगी थी।

गीत के बोल (मुख्य अंश)

"पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है सुरमई उजाला है, चंपई अंधेरा है..."


एक दिलचस्प बात: इस फिल्म के दौरान ही वहीदा रहमान और अभिनेता कमलजीत एक-दूसरे के करीब आए थे और बाद में उन्होंने शादी कर ली थी। 

(This video is posted by channel – {Shemaroo} on YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is added to this post for knowledge purposes only.)

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