Tuesday, October 14, 2025

उसी का माल तो बिकता है....Usi ka maalto bikta hai

 उसी का माल तो बिकता है, इस ज़माने में

जो अपने ,नीम के,पत्तों को ज़ाफरान कहे.......





Usi ka maal, to bikta hai, is zamaane mein

Jo apne, neem ke, patton ko , zaafran..... kahe....


Nawaz Deobandi

Painting by Jennifer McCHRISTIAN


Dr. APJ Abdul Kalam Biography in Hindi By Gulzar Saab Motivational Story



 (This video is posted by channel – Vivekananda Samiti IIT Kanpur on YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is added to this post for knowledge purposes only.)

एक मीठी सी चुभन HD - रेशमा और शेरा - वहीदा रहमान, सुनील दत्त - लता मंगेशकर - Old Is Gold


 यह गाना 'एक मीठी सी चुभन' 1971 की क्लासिक हिंदी फिल्म 'रेशमा और शेरा' से है, जिसे लता मंगेशकर ने गाया है और जिसमें वहीदा रहमान और सुनील दत्त पर फिल्माया गया है।

गाने का सार और मतलब इस प्रकार है:

  1. शीर्षक का अर्थ: 'एक मीठी सी चुभन' का शाब्दिक अर्थ है "एक मीठा दर्द (या टीस)"। यह शब्द-समूह प्यार में पड़ने के शुरुआती, सुखद एहसास को दर्शाता है - एक ऐसा रोमांच जो बेचैनी और खुशी दोनों पैदा करता है।

  2. भावना: यह गाना प्रेम की शुरुआती अवस्था, मिलन की तीव्र इच्छा, और अज्ञात भविष्य की चिंता की भावनाओं से भरा हुआ है।

  3. मुख्य भाव और गीत के बोल (आंशिक):

    • गीत में नायिका (रेशमा) अपने अंदर के नए और अनजाने एहसास का वर्णन कर रही है। वह कहती है कि वह हवा में 'एक मीठी सी चुभन, एक ठंडी सी अगन' (एक मीठा दर्द, एक ठंडी आग) महसूस कर रही है। यह विरोधाभास (paradox) बताता है कि प्यार एक साथ सुखदायक और बेचैन करने वाला कैसे हो सकता है।

    • वह बताती है कि उसका मन ही मन में नाच रहा है और मुस्कुरा रहा है, क्योंकि उसके मन का सूना आंगन अब प्यार की बहार से भर गया है।

    • गीत में वह अपने भगवान से यह भी प्रार्थना करती है कि यह 'रसवंती हवा' (प्यार से भरी हवा) कहीं 'तूफान न बन जाए'। यह हिस्सा उनके प्रेम कहानी के दुखद अंत की ओर इशारा करता है, जहाँ उन्हें अपने प्यार को बचाने के लिए सामाजिक दुश्मनी और हिंसा का सामना करना पड़ता है। वह अपने भोले प्यार और अनजान मन के लिए सुरक्षा मांगती है।

  4. संगीत और दृश्य: जयदेव के मधुर संगीत और लता मंगेशकर की मीठी आवाज़ के साथ, यह गाना वहीदा रहमान के चेहरे के भावों के माध्यम से प्यार की मासूमियत, खुशी और अंदरूनी डर को खूबसूरती से प्रस्तुत करता है।

संक्षेप में, यह गीत प्यार के उस पहले और रोमांचक अनुभव का वर्णन करता है जो मन में एक साथ मीठी खुशी और नाजुक चिंता पैदा करता है, विशेष रूप से एक ऐसी प्रेम कहानी में जिसकी राह आसान नहीं है।

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नदी नारे ना जाओ श्याम पैयाँ पडूँ HD - मुझे जीने दो - सुनील दत्त, वहीदा रहमान - आशा भोसले


 

यह गीत भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग का एक बहुत ही सुंदर और प्रसिद्ध लोक-गीत (Folk Song) है। फिल्म 'मुझे जीने दो' (1963) का यह गाना अपनी सादगी और मिट्टी की खुशबू के लिए आज भी याद किया जाता है।

यहाँ इस गीत से जुड़ी कुछ खास जानकारी दी गई है:

Shagoon - Parbaton Ke Pedon Par Shaam - Mohd.Rafi - Suman Kalyanpur




यह गीत फिल्म 'शगुन' (1964) का एक कालजयी क्लासिक (Timeless Classic) है। इसे हिंदी सिनेमा के सबसे रोमांटिक और सुकून देने वाले गानों में गिना जाता है। इस गीत की शांति और गहराई आज भी श्रोताओं को एक अलग दुनिया में ले जाती है।

यहाँ इस गीत से जुड़ी मुख्य जानकारी दी गई है:

गीत का विवरण

  • गायक: मोहम्मद रफ़ी और सुमन कल्याणपुर

  • संगीतकार: खय्याम (Khayyam)

  • गीतकार: साहिर लुधियानवी

  • फिल्म: शगुन (1964)

  • कलाकार: कमलजीत और वहीदा रहमान


गीत की खासियत

  1. खय्याम का संगीत: खय्याम साहब अपनी धुनों में 'ठहराव' के लिए जाने जाते थे। इस गाने में उन्होंने न्यूनतम वाद्य यंत्रों (Minimal instruments) का प्रयोग किया है ताकि रफ़ी साहब और सुमन जी की आवाज़ की कोमलता उभर कर आए।

  2. साहिर की शायरी: "पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है" - ये पंक्तियाँ प्रकृति और प्रेम के मिलन को खूबसूरती से दर्शाती हैं।

  3. सुमन कल्याणपुर और रफ़ी की जुगलबंदी: कई लोग इस गाने में सुमन कल्याणपुर की आवाज़ को लता मंगेशकर की आवाज़ समझ लेते हैं, क्योंकि उनकी गायकी में वही सुरीलापन और सादगी थी।

गीत के बोल (मुख्य अंश)

"पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है सुरमई उजाला है, चंपई अंधेरा है..."


एक दिलचस्प बात: इस फिल्म के दौरान ही वहीदा रहमान और अभिनेता कमलजीत एक-दूसरे के करीब आए थे और बाद में उन्होंने शादी कर ली थी। 

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Kabhi Tanhaiyo Me Humari Yaad Aayegi | Hamari Yaad Aayegi | Mubarak Begum | Old Hits | Nupur Audio


 

यह गीत भारतीय संगीत इतिहास का एक ऐसा रत्न है जिसकी चमक वक्त के साथ और बढ़ती गई है। फिल्म 'हमारी याद आएगी' (1961) का यह शीर्षक गीत (Title Track) मुबारक बेगम की सबसे बड़ी पहचान बना।

यहाँ इस भावुक कर देने वाले गीत की जानकारी दी गई है:

गीत का विवरण

  • गायिका: मुबारक बेगम

  • संगीतकार: स्नेहल भाटकर (Snehal Bhatkar)

  • गीतकार: किदार शर्मा (Kidar Sharma)

  • फिल्म: हमारी याद आएगी (1961)

  • कलाकार: तनुजा और अशोक शर्मा


इस गीत से जुड़ी खास बातें

  1. मुबारक बेगम की आवाज़: यह गाना मुबारक बेगम के करियर का सबसे सफल गाना माना जाता है। उनकी आवाज़ में जो दर्द और खनक है, उसने इस गाने को 'अमर' बना दिया।

  2. तनुजा की पहली फिल्म: इस फिल्म से अभिनेत्री तनुजा (काजोल की माँ) ने बतौर मुख्य अभिनेत्री अपने करियर की शुरुआत की थी।

  3. सादगी और गहराई: संगीतकार स्नेहल भाटकर ने बहुत ही कम साज़ों का इस्तेमाल किया, जिससे गीत के बोल सीधे दिल को छूते हैं।

गीत के बोल (मुख्य अंश)

"कभी तन्हाइयों में यूँ, हमारी याद आएगी अँधेरे छा रहे होंगे, कि बिजली कौंध जाएगी"


क्या आप जानते हैं?

मुबारक बेगम ने एक बार बताया था कि इस गाने की रिकॉर्डिंग के वक्त वे बहुत भावुक हो गई थीं। किदार शर्मा (जो फिल्म के निर्देशक और गीतकार दोनों थे) चाहते थे कि गाने में विछोह का असली दर्द महसूस हो, और मुबारक बेगम ने उसे बखूबी निभाया।

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ये ज़िंदगी उसी कि है Ye Zindagi Usi Ki Hai - अनारकली 1953, लता मंगेशकर Lata Mangeshkar - वीडियो सोंग


 



यह गीत भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित और भावुक गीतों में से एक है। फिल्म 'अनारकली' (1953) का यह गाना लता मंगेशकर की अमर आवाज़ और बीना राय के यादगार अभिनय के लिए जाना जाता है।

यहाँ इस सदाबहार गीत की जानकारी दी गई है:

गीत का विवरण

  • गायिका: लता मंगेशकर

  • संगीतकार: सी. रामचंद्र (C. Ramchandra)

  • गीतकार: राजेंद्र कृष्ण

  • फिल्म: अनारकली (1953)

  • कलाकार: बीना राय और प्रदीप कुमार


गीत की मुख्य विशेषताएं

  1. फिल्म का आधार: यह फिल्म मुगल शहजादे सलीम और नर्तकी अनारकली की दुखांत प्रेम कहानी पर आधारित है। यह गाना उस वक्त आता है जब अनारकली को दीवार में चिनवाया जा रहा होता है।

  2. दो भाग: इस गाने के दो भाग हैं। पहला भाग एक मधुर प्रेम गीत की तरह शुरू होता है, जबकि दूसरा भाग (जो फिल्म के अंत में आता है) अत्यंत दर्दनाक और मार्मिक है।

  3. लता जी की गायकी: लता मंगेशकर ने इस गाने में जो दर्द और गहराई पिरोई है, उसने इसे भारतीय संगीत के इतिहास में एक 'मास्टरपीस' बना दिया।

गीत के बोल (मुख्य अंश)

"ये ज़िंदगी उसी की है, जो किसी का हो गया प्यार ही में खो गया... ये ज़िंदगी उसी की है..."

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