Artist and Music: The ghazal is sung by the revered Lata Mangeshkar, and the music is composed by the maestro Madan Mohan.
Their collaboration on this piece is widely celebrated. The composition is noted for its ability to convey deep emotion, and it is said that even the great music director Naushad praised Madan Mohan for this ghazal.
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Sunday, September 02, 2012
RASM-E-ULFAT KO NIBHAYEIN TO NIBHAYEIN KAISE / LATA MANGESHKAR / MADAN MOHAN / DIL KI R...
Hum Bekhudi Mein Tum Ko Pukare HD Song
यह गाना 'हम बेखुदी में तुम को पुकारे चले गए' हिंदी सिनेमा के सबसे मधुर और सदाबहार गीतों में से एक है।
गीत का विवरण (Song Details)
| विवरण | जानकारी |
| फिल्म (Movie) | काला पानी (Kala Pani) |
| रिलीज़ वर्ष (Release Year) | 1958 |
| गायक (Singer) | मोहम्मद रफ़ी (Mohammed Rafi) |
| संगीत निर्देशक (Music Director) | एस. डी. बर्मन (S. D. Burman) |
| गीतकार (Lyricist) | मजरूह सुल्तानपुरी (Majrooh Sultanpuri) |
| कलाकार (Star Cast) | देव आनंद (Dev Anand), मधुबाला (Madhubala), नलिनी जयवंत (Nalini Jaywant) |
रोचक तथ्य (Interesting Fact)
देव आनंद और एस. डी. बर्मन का जादू: यह गीत उस ज़माने की सबसे सफल संगीतकार-अभिनेता जोड़ियों में से एक, एस. डी. बर्मन और देव आनंद के तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। बर्मन दा ने देव आनंद की कई फिल्मों के लिए यादगार संगीत दिया, और यह गाना उनकी रचनात्मक साझेदारी की गहराई को दर्शाता है।
मोहम्मद रफ़ी की भावपूर्ण आवाज़: इस गाने को मोहम्मद रफ़ी की सबसे बेहतरीन रचनाओं में गिना जाता है। जिस तरह से उन्होंने गाने में तड़प, नशा और बेखुदी (unconsciousness/intoxication) के भावों को अपनी आवाज़ से व्यक्त किया है, वह इसे एक कालातीत क्लासिक (timeless classic) बनाता है।
मजरूह सुल्तानपुरी के बोल: मजरूह सुल्तानपुरी के गीत ऐसे हैं जो एक नशे में डूबे व्यक्ति की पीड़ा को दर्शाते हैं, जो अपनी प्रियतमा को पुकारता चला जाता है। उनके सरल लेकिन गहरे बोल इस गाने को भावनात्मक ऊँचाई प्रदान करते हैं।
यह गीत आज भी पुरानी हिंदी फिल्मों के संगीत प्रेमियों के बीच बहुत लोकप्रिय है।
Rahe na rahen ham mehka karenge..lata-rafi-suman kalyanpur-roshan-tribut...
"रहे न रहें हम, महका करेंगे..." भारतीय संगीत के इतिहास का एक ऐसा अनमोल मोती है, जिसकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ती। फिल्म 'ममता' (1966) का यह गीत प्रेम, यादों और अमरता का सबसे खूबसूरत उदाहरण है।
यहाँ इस गीत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है:
गीत का विवरण
फिल्म: ममता (1966)
संगीतकार: रोशन (Roshan)
गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी
मुख्य कलाकार: सुचित्रा सेन, अशोक कुमार और धर्मेन्द्र
इस गीत के तीन अलग संस्करण (Versions)
दिलचस्प बात यह है कि इस गीत को फिल्म में तीन अलग-अलग आवाजों में पेश किया गया था:
लता मंगेशकर (Solo): यह सबसे प्रसिद्ध संस्करण है, जिसे सुचित्रा सेन पर फिल्माया गया है।
मो. रफ़ी और सुमन कल्याणपुर (Duet): यह संस्करण भी बहुत लोकप्रिय है और इसमें एक अलग तरह का सुकून है।
लता मंगेशकर (Sad Version): इसे फिल्म के एक भावुक मोड़ पर इस्तेमाल किया गया है।
गीत की खासियत
संगीत: रोशन साहब ने इस गाने में सारंगी और बांसुरी का बहुत ही महीन इस्तेमाल किया है, जो दिल में एक मीठा सा दर्द पैदा करता है।
शायरी: मजरूह सुल्तानपुरी के बोल, "बन के कली, बन के सबा, बागे-वफ़ा में..." आज भी रूह को सुकून देते हैं।
सुमन कल्याणपुर और लता जी: अक्सर लोग सुमन कल्याणपुर की आवाज़ को लता जी की आवाज़ समझ लेते थे। इस फिल्म में दोनों ने एक ही गाने के अलग-अलग वर्ज़न गाकर अपनी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
गीत के बोल (मुख्य अंश)
"रहे न रहें हम, महका करेंगे बन के कली, बन के सबा, बागे-वफ़ा में रहे न रहें हम..."
ममता (1966) एक ऐसी फिल्म है जो अपनी कहानी और संगीत दोनों के लिए आज भी याद की जाती है। चूँकि आपने 'जी' कहा, तो चलिए इस फिल्म और संगीतकार रोशन के बारे में कुछ खास बातें साझा करता हूँ:
फिल्म 'ममता' की कहानी
यह फिल्म एक माँ (सुचित्रा सेन) के त्याग की कहानी है। सुचित्रा सेन ने इसमें दोहरी भूमिका (Double Role) निभाई थी—एक माँ की और दूसरी उसकी बेटी की। यह बंगाली फिल्म 'उत्तर फाल्गुनी' की रीमेक थी। माँ अपनी बेटी को समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए खुद को दूर रखती है।
संगीतकार रोशन का जादू
रोशन साहब (जो वर्तमान अभिनेता ऋतिक रोशन के दादा थे) अपनी धुनों में शास्त्रीय संगीत (Classical Music) का बहुत सुंदर प्रयोग करते थे।
इस फिल्म के अन्य गाने भी उतने ही लाजवाब हैं:
छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा: (हेमंत कुमार और लता मंगेशकर) - यह गाना भी उतना ही अमर है।
विकल मोरा मनवा: (लता मंगेशकर) - शास्त्रीय संगीत पर आधारित एक बेहतरीन रचना।
एक छोटी सी भेंट (Tribute)
संगीतकार रोशन, साहिर लुधियानवी और मजरूह सुल्तानपुरी की जोड़ी ने हमें ऐसे गाने दिए जो कभी पुराने नहीं होते। "रहे न रहें हम" आज भी विदाई या यादों के समय गाया जाने वाला सबसे पसंदीदा गाना है।
"मौसम कोई हो, इस चमन में, रंग बन के रहेंगे हम" (यह पंक्ति सिखाती है कि इंसान चला जाता है, लेकिन उसके अच्छे काम और यादें हमेशा महकती रहती हैं।)
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O Sajanaa Barakhaa - Sadhana - Vasant Choudhary - Parakh Songs - Lata Mangeshkar
"ओ सजना बरखा बहार आई" भारतीय सिनेमा का एक ऐसा मास्टरपीस है, जिसे आज भी बारिश के बेहतरीन गीतों में सबसे ऊपर रखा जाता है। बिमल रॉय की फिल्म 'परख' (1960) का यह गाना अपनी सादगी और सुरीलेपन के लिए दुनिया भर में मशहूर है।
यहाँ इस गीत से जुड़ी कुछ विशेष और रोचक जानकारियाँ दी गई हैं:
गीत का मुख्य विवरण
गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: सलिल चौधरी (Salil Chowdhury)
गीतकार: शैलेन्द्र
कलाकार: साधना (Sadhana) और वसंत चौधरी
इस गीत की खास बातें
बंगाली मूल (Bengali Origin): यह गाना पहले एक बंगाली गैर-फिल्मी गीत के रूप में रिकॉर्ड किया गया था, जिसके बोल थे "ना जेओ ना" (Na Jeo Na)। सलिल दा ने ही इसकी मूल धुन तैयार की थी, जिसे बाद में उन्होंने 'परख' के लिए हिंदी में ढाल दिया।
संगीत की विशेषता: सलिल चौधरी ने इस गाने में सितार का बहुत ही अनोखा और सुंदर उपयोग किया है। गाने की शुरुआत में सितार की जो धुन बजती है, वह गिरती हुई बारिश की बूंदों का एहसास दिलाती है।
न्यूनतम साज़ (Minimal Instruments): इस गाने में बहुत ज़्यादा वाद्य यंत्रों का उपयोग नहीं किया गया है, ताकि लता जी की आवाज़ की कोमलता और मधुरता पूरी तरह उभर कर आए।
साधना का अभिनय: यह अभिनेत्री साधना की शुरुआती फिल्मों में से एक थी। उनकी मासूमियत और सादगी ने इस गाने को विज़ुअली भी अमर बना दिया।
कहानी का हिस्सा: फिल्म में साधना एक पोस्टमास्टर की बेटी का किरदार निभा रही हैं और वह बारिश के बीच अपने प्रेमी (जो एक स्कूल मास्टर है) को याद करते हुए यह गीत गाती हैं।
गीत के बोल (मुख्य अंश)
"ओ सजना, बरखा बहार आई रस की फुहार लाई, अखियों में प्यार लाई..."
सलिल चौधरी का जादुई संगीत
सलिल दा को "द लेजेंडरी कंपोजर" कहा जाता था क्योंकि वे वेस्टर्न क्लासिकल और इंडियन फोल्क को मिलाना जानते थे।
इस गाने में उन्होंने 'सितार' का जो इस्तेमाल किया है, वह संगीत की दुनिया में एक मिसाल है। सितार की हर तान बारिश की एक बूंद की तरह महसूस होती है।
उन्होंने इस गाने में 'पॉलिफोनी' (Polyphony) तकनीक का इस्तेमाल किया था, जो उस समय के भारतीय संगीत में बहुत कम देखी जाती थी।
3. फिल्म 'परख' के अन्य बेहतरीन गीत
अगर आपको "ओ सजना" पसंद है, तो आपको इस फिल्म के ये गाने भी जरूर सुनने चाहिए:
"मिला है किसी का झुमका" - लता मंगेशकर (एक बहुत ही चुलबुला गाना)
"मेरे मन के दिए" - लता मंगेशकर (एक बहुत ही शांत और गहरा गाना)
फिल्म 'परख' के बारे में एक छोटी सी बात:
यह फिल्म एक सामाजिक व्यंग्य (Social Satire) थी, जिसे महान निर्देशक बिमल रॉय ने बनाया था। फिल्म यह परखती है कि लालच के सामने इंसान की ईमानदारी कितनी टिक पाती है।
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Tasveer Teri Dil Mein Mohd Rafi Lata Mangeshkar in Maya
फिल्म 'माया' (1961) का यह गीत मोहम्मद रफ़ी और लता मंगेशकर के सबसे प्रसिद्ध और पसंदीदा युगल गीतों (Duets) में से एक है। देव आनंद और माला सिन्हा पर फिल्माया गया यह गाना अपने संगीत और बोलों के लिए आज भी उतना ही लोकप्रिय है।
गीत का विवरण:
गायक: मोहम्मद रफ़ी और लता मंगेशकर
संगीतकार: सलिल चौधरी (Salil Chowdhury)
गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी
फिल्म: माया (1961)
कलाकार: देव आनंद और माला सिन्हा
इस गीत से जुड़ी दिलचस्प बातें:
धुनों का जादू: सलिल चौधरी ने इस गाने में पाश्चात्य संगीत (Western Music) के तत्वों और भारतीय मेलोडी का अद्भुत मिश्रण किया है। गाने का आर्केस्ट्रेशन बहुत ही आधुनिक और मधुर है।
देव आनंद का अंदाज़: देव आनंद के सदाबहार रोमांटिक अंदाज़ और माला सिन्हा की खूबसूरती ने इस गाने को विजुअली यादगार बना दिया।
मजरूह सुल्तानपुरी की कलम: "तस्वीर तेरी दिल में जिस दिन से उतारी है" - इन बोलों ने प्यार के प्रति समर्पण को बहुत गहराई से व्यक्त किया है।
गीत के बोल (मुख्य अंश):
"तस्वीर तेरी दिल में जिस दिन से उतारी है फिर "
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Tera mera pyar amar
फिल्म 'असली नकली' (1962) का यह गीत "तेरा मेरा प्यार अमर" हिंदी सिनेमा के सबसे रोमांटिक और मधुर गीतों में से एक है। लता मंगेशकर की सुरीली आवाज़ और साधना की खूबसूरती ने इसे यादगार बना दिया है।
यहाँ इस गीत की पूरी जानकारी दी गई है:
गीत का विवरण
गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: शंकर-जयकिशन (Shankar-Jaikishan)
गीतकार: हसरत जयपुरी
फिल्म: असली नकली (1962)
कलाकार: साधना और देव आनंद
गीत की मुख्य विशेषताएं
साधना और देव आनंद की केमिस्ट्री: इस गाने में साधना की सादगी और देव आनंद का स्टाइलिश रोमांटिक अंदाज़ देखते ही बनता है।
शंकर-जयकिशन का संगीत: शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने इस फिल्म के लिए बहुत ही मधुर संगीत दिया था। इस गाने में गिटार और ऑर्केस्ट्रा का उपयोग बहुत ही कोमल तरीके से किया गया है।
सदाबहार बोल: हसरत जयपुरी ने प्यार की अमरता को बहुत ही सरल लेकिन प्रभावशाली शब्दों में पिरोया है।
गीत के बोल (मुख्य अंश)
"तेरा मेरा प्यार अमर, फिर क्यों मुझको लगता है डर मेरे जीवन साथी बता, क्यों दिल धड़के रह-रह कर..."
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Rafi & Lata - Jewan Mein Piya Tera Sath Rahe - Goonj Uthi Shehnai [1959]
यह गीत भारतीय शास्त्रीय संगीत और सुगम संगीत का एक अद्भुत संगम है। फिल्म 'गूँज उठी शहनाई' (1959) का यह युगल गीत मोहम्मद रफ़ी और लता मंगेशकर के सबसे सुरीले गीतों में गिना जाता है।
यहाँ इस गीत से जुड़ी कुछ विशेष जानकारी दी गई है:
गीत का विवरण
गायक: मोहम्मद रफ़ी और लता मंगेशकर
संगीतकार: वसंत देसाई (Vasant Desai)
गीतकार: भरत व्यास
फिल्म: गूँज उठी शहनाई (1959)
कलाकार: राजेंद्र कुमार और अमीता
गीत की मुख्य विशेषताएँ
वसंत देसाई का संगीत: वसंत देसाई साहब अपने संगीत में शुद्धता और रागों के प्रयोग के लिए जाने जाते थे। इस गाने में उन्होंने शहनाई के साथ ऑर्केस्ट्रा का बहुत ही सुंदर समन्वय किया है।
शहनाई का जादू: चूँकि फिल्म एक शहनाई वादक की कहानी है, इसलिए इस पूरे गाने में उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की शहनाई की मधुर धुनें पार्श्व (background) में सुनाई देती हैं, जो इसे एक दिव्य अनुभव बनाती हैं।
भरत व्यास के बोल: भरत व्यास जी ने बहुत ही शुद्ध और सरल हिंदी शब्दों का प्रयोग किया है, जो जीवन भर साथ निभाने के वादे को दर्शाते हैं।
गीत के बोल (मुख्य अंश)
"जीवन में पिया तेरा साथ रहे हाथों में तेरे मेरा हाथ रहे जीवन में पिया तेरा साथ रहे..."
फिल्म के बारे में रोचक तथ्य
फिल्म 'गूँज उठी शहनाई' राजेंद्र कुमार की शुरुआती बड़ी हिट फिल्मों में से एक थी, जिसने उन्हें 'जुबली कुमार' बनाने की नींव रखी। इस फिल्म का पूरा संगीत शहनाई पर आधारित होने के कारण आज भी संगीत के छात्रों के लिए एक मिसाल है।
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