यह गीत भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग का एक बहुत ही सुंदर और प्रसिद्ध लोक-गीत (Folk Song) है। फिल्म 'मुझे जीने दो' (1963) का यह गाना अपनी सादगी और मिट्टी की खुशबू के लिए आज भी याद किया जाता है।
यहाँ इस गीत से जुड़ी कुछ खास जानकारी दी गई है:
यह गीत भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग का एक बहुत ही सुंदर और प्रसिद्ध लोक-गीत (Folk Song) है। फिल्म 'मुझे जीने दो' (1963) का यह गाना अपनी सादगी और मिट्टी की खुशबू के लिए आज भी याद किया जाता है।
यहाँ इस गीत से जुड़ी कुछ खास जानकारी दी गई है:
यह गीत फिल्म 'शगुन' (1964) का एक कालजयी क्लासिक (Timeless Classic) है। इसे हिंदी सिनेमा के सबसे रोमांटिक और सुकून देने वाले गानों में गिना जाता है। इस गीत की शांति और गहराई आज भी श्रोताओं को एक अलग दुनिया में ले जाती है।
यहाँ इस गीत से जुड़ी मुख्य जानकारी दी गई है:
गायक: मोहम्मद रफ़ी और सुमन कल्याणपुर
संगीतकार: खय्याम (Khayyam)
गीतकार: साहिर लुधियानवी
फिल्म: शगुन (1964)
कलाकार: कमलजीत और वहीदा रहमान
खय्याम का संगीत: खय्याम साहब अपनी धुनों में 'ठहराव' के लिए जाने जाते थे। इस गाने में उन्होंने न्यूनतम वाद्य यंत्रों (Minimal instruments) का प्रयोग किया है ताकि रफ़ी साहब और सुमन जी की आवाज़ की कोमलता उभर कर आए।
साहिर की शायरी: "पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है" - ये पंक्तियाँ प्रकृति और प्रेम के मिलन को खूबसूरती से दर्शाती हैं।
सुमन कल्याणपुर और रफ़ी की जुगलबंदी: कई लोग इस गाने में सुमन कल्याणपुर की आवाज़ को लता मंगेशकर की आवाज़ समझ लेते हैं, क्योंकि उनकी गायकी में वही सुरीलापन और सादगी थी।
"पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है सुरमई उजाला है, चंपई अंधेरा है..."
(This video is posted by channel – {Shemaroo}
on YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is
added to this post for knowledge purposes only.)
यह गीत भारतीय संगीत इतिहास का एक ऐसा रत्न है जिसकी चमक वक्त के साथ और बढ़ती गई है। फिल्म 'हमारी याद आएगी' (1961) का यह शीर्षक गीत (Title Track) मुबारक बेगम की सबसे बड़ी पहचान बना।
यहाँ इस भावुक कर देने वाले गीत की जानकारी दी गई है:
गायिका: मुबारक बेगम
संगीतकार: स्नेहल भाटकर (Snehal Bhatkar)
गीतकार: किदार शर्मा (Kidar Sharma)
फिल्म: हमारी याद आएगी (1961)
कलाकार: तनुजा और अशोक शर्मा
मुबारक बेगम की आवाज़: यह गाना मुबारक बेगम के करियर का सबसे सफल गाना माना जाता है। उनकी आवाज़ में जो दर्द और खनक है, उसने इस गाने को 'अमर' बना दिया।
तनुजा की पहली फिल्म: इस फिल्म से अभिनेत्री तनुजा (काजोल की माँ) ने बतौर मुख्य अभिनेत्री अपने करियर की शुरुआत की थी।
सादगी और गहराई: संगीतकार स्नेहल भाटकर ने बहुत ही कम साज़ों का इस्तेमाल किया, जिससे गीत के बोल सीधे दिल को छूते हैं।
"कभी तन्हाइयों में यूँ, हमारी याद आएगी अँधेरे छा रहे होंगे, कि बिजली कौंध जाएगी"
मुबारक बेगम ने एक बार बताया था कि इस गाने की रिकॉर्डिंग के वक्त वे बहुत भावुक हो गई थीं। किदार शर्मा (जो फिल्म के निर्देशक और गीतकार दोनों थे) चाहते थे कि गाने में विछोह का असली दर्द महसूस हो, और मुबारक बेगम ने उसे बखूबी निभाया।
(This video is posted by channel – {Nupur Movies}
on YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is
added to this post for knowledge purposes only.)
यह गीत भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित और भावुक गीतों में से एक है। फिल्म 'अनारकली' (1953) का यह गाना लता मंगेशकर की अमर आवाज़ और बीना राय के यादगार अभिनय के लिए जाना जाता है।
यहाँ इस सदाबहार गीत की जानकारी दी गई है:
गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: सी. रामचंद्र (C. Ramchandra)
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
फिल्म: अनारकली (1953)
कलाकार: बीना राय और प्रदीप कुमार
फिल्म का आधार: यह फिल्म मुगल शहजादे सलीम और नर्तकी अनारकली की दुखांत प्रेम कहानी पर आधारित है। यह गाना उस वक्त आता है जब अनारकली को दीवार में चिनवाया जा रहा होता है।
दो भाग: इस गाने के दो भाग हैं। पहला भाग एक मधुर प्रेम गीत की तरह शुरू होता है, जबकि दूसरा भाग (जो फिल्म के अंत में आता है) अत्यंत दर्दनाक और मार्मिक है।
लता जी की गायकी: लता मंगेशकर ने इस गाने में जो दर्द और गहराई पिरोई है, उसने इसे भारतीय संगीत के इतिहास में एक 'मास्टरपीस' बना दिया।
"ये ज़िंदगी उसी की है, जो किसी का हो गया प्यार ही में खो गया... ये ज़िंदगी उसी की है..."
(This video is posted by channel – {HD Songs Bollywood}
on YouTube, and Raree India has no direct claims to this video. This video is
added to this post for knowledge purposes only.)
This video, titled "BBC The Story of India," explores various aspects of Indian history and culture.
Here are some details from the video:
Custodians of Shiva The video begins with a discussion with a custodian of a Shiva shrine, who emphasizes the possibility of maintaining tradition while embracing modernity [
कई लोग... कितना होना है.... कितना नहीं.... के बीच फंसे हैं